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Showing posts from June, 2023

सच्चा इंसान है वो ...

  इंसान इंसानियत को माने , कभी अपने अंदर भी झांके। ढूढ़े खुद को भीड़ में कहीं खुद को भी पहचाने इंसान इंसानियत को माने दूसरों के दर्द को समझे जो , हर इंसान को इंसान समझे जो , मजहब और धर्म से परे जो , इंसानियत को सब कुछ समझे जो , सच्चा इंसान है वो पर अभी कहीं गुमशुदा , गुमनाम है वो।  

राह पर चलना जरूरी

सीखने की कोई उम्र नहीं होती , सीखने की इच्छा होना जरूरी है। अपने मकसद पर अड़े रहना जरूरी है। मिलेगी मंजिल तय है , बस उसके लिए राह पर चलना जरूरी है। इच्छा जहाँ होती है , वहां हर राह जाती है मंजिल तक। राह काँटों भरी होती है , इंसा को भ्रमित करती है , पर एक विश्वास मन में जरुरी है , मिलेगी मंजिल जरुर राह पर चलना जरूरी है।   

लो वसंत आया है

लो वसंत आया है , खुशियों वाला नया साल लाया है।   नीले आसमान के ललाट पर भोर के उगते सूरज ने बिदियाँ सजाई है।   सिंदूरी आँचल ओढ़े सुबह खुशियां जग में लाई हैं , चिड़ियों की चहचहाट ने जैसे दिन से रात का परदा हटाया है। लो वसंत आया है खुशियों भरा नया साल लाया है। नदिया का कल कल बहता पानी , कह रहा जैसे एक कहानी। बहा दो दिल से दुखों को सारे शुरू करो फिर से नई जिंदगानी।   उगता सूरज नई उम्मीदों का पैगाम लाया   है ।  

कला के साथ शिक्षा

कुछ खलिश सी है ..

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हाँ मैं नारी हूँ

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हिन्दी है माथे की बिंदी

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स्वरों को याद कीजिये कुछ ऐसे

 अ आ इ ई ऋ  उ ऊ ओ औ  अ अनार के पेड़ लगे हैं, जो मेरे आँगन में खड़े हैं l आ से आये रसीले आम, मुझको बहुत भाते हैं आम l इ से इमली आती है याद, जब लेते हैं खट्टी चीजों का नाम l ई ईख के खेत खड़े हैं, जो मेरे पापा से लंबे हैंl उ से उल्लू कहलाता हूँ, जब रिजल्ट दिखलाता हूँ l ऊ से ऊन से स्वेटर बुनकर, माँ सर्दी में रखती है मुझको ढककर l ऋ ऋषियों की वाणी है, काया मिट्टी में मिल जानी हैl ए से एड़ी चोटी का जोर लगाया, तब जाकर दौड़ जीत पायाl ऐ ऐनक जब न पहने है, दीदी का पैर तब फिसले हैl ओ ओखली को जो भूले थे, याद उसे फिर करते हैंl औ औषधि जो होती है, हर दर्द को दूर वो करती हैl @ मेखला