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वर्णमाला व्यंजन

  वर्णमाला व्यंजन   क कमल के फूल खिले हैं, ख से खग बैठे हैं कुंज में ग गमला ले आओ भैया, घ का घड़ा पड़ा उपवन में आगे बोलो ङ खाली, सभी बजाओ ताली       च से चमके चंदा मामा, छ का छप्पर छाए ज से बने जलेबी देवी, झ झबला पहने है छुटकी आगे बोलो ञ खाली, सभी बजाओ ताली   ट टमटम ले चला बटोही, ठ से ठक-ठक करता द्वार ड से डम-डम बोले डमरू, ढ ढपली से निकले है ताल   आगे बोलो ‌ण खाली सभी बजाओ ताली   त का तबला लिए तबलची, थ से थप थपाता द दरवाजा खोल ले मन का, ध से धन्य हो जाता   आगे बोलो न नकली , सभी बजाओ ताली   प पतंग के पेंच लड़े हैं, फ से फल लगे हैं उपवन में । ब बगिया में फूल खिले, भ से भवंरे डोले आगे बोलो म मलाई, सभी बजाओ ताली   य से यश पाओगे जगत में, र से रण जो जीतोगे जीवन में   ल से लक्ष्य नहीं छूटेगा, व वरदान मिला जो शरीर का   श शहद सा मीठा बोले, ष षड्यन्त्र से दूर रहें स सफलता कदम है चूमे, ह से हल मुश्किल जब होय   क्ष से क्षत्रिय उठता है , त्र से त्रस्त जब कोई करता है ज्ञ ...

सच्चा इंसान है वो ...

  इंसान इंसानियत को माने , कभी अपने अंदर भी झांके। ढूढ़े खुद को भीड़ में कहीं खुद को भी पहचाने इंसान इंसानियत को माने दूसरों के दर्द को समझे जो , हर इंसान को इंसान समझे जो , मजहब और धर्म से परे जो , इंसानियत को सब कुछ समझे जो , सच्चा इंसान है वो पर अभी कहीं गुमशुदा , गुमनाम है वो।  

राह पर चलना जरूरी

सीखने की कोई उम्र नहीं होती , सीखने की इच्छा होना जरूरी है। अपने मकसद पर अड़े रहना जरूरी है। मिलेगी मंजिल तय है , बस उसके लिए राह पर चलना जरूरी है। इच्छा जहाँ होती है , वहां हर राह जाती है मंजिल तक। राह काँटों भरी होती है , इंसा को भ्रमित करती है , पर एक विश्वास मन में जरुरी है , मिलेगी मंजिल जरुर राह पर चलना जरूरी है।   

लो वसंत आया है

लो वसंत आया है , खुशियों वाला नया साल लाया है।   नीले आसमान के ललाट पर भोर के उगते सूरज ने बिदियाँ सजाई है।   सिंदूरी आँचल ओढ़े सुबह खुशियां जग में लाई हैं , चिड़ियों की चहचहाट ने जैसे दिन से रात का परदा हटाया है। लो वसंत आया है खुशियों भरा नया साल लाया है। नदिया का कल कल बहता पानी , कह रहा जैसे एक कहानी। बहा दो दिल से दुखों को सारे शुरू करो फिर से नई जिंदगानी।   उगता सूरज नई उम्मीदों का पैगाम लाया   है ।  

कला के साथ शिक्षा

कुछ खलिश सी है ..

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हाँ मैं नारी हूँ

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