सच्चा इंसान है वो ...

 

इंसान इंसानियत को माने,


कभी अपने अंदर भी झांके।


ढूढ़े खुद को भीड़ में कहीं


खुद को भी पहचाने


इंसान इंसानियत को माने


दूसरों के दर्द को समझे जो,


हर इंसान को इंसान समझे जो,


मजहब और धर्म से परे जो,

इंसानियत को सब कुछ समझे जो,


सच्चा इंसान है वो पर


अभी कहीं गुमशुदा, गुमनाम है वो।

 

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